दरगाहें केजीएमयू की स्थापना से कई सदियों पूर्व की हैं
लखनऊ। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्रशेखर आजाद ने यूपी के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को लिखे पत्र में कहा है कि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ परिसर में स्थित ऐतिहासिक दरगाह शाहमीना शाह, हजरत हाजी हरमैन जी एवं अन्य मजारों को हटाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किए जाने से प्रदेश में उलेमाओं, दरगाह कमेटी तथा आम नागरिकों में गहरी चिंता एवं रोष व्याप्त है।

हजरत हाजी हरमैन जी की दरगाह की नींव लगभग 15वीं सदी (1426 ई.) में रखी गई थी
उन्होंने कहा कि यह एक स्थापित ऐतिहासिक तथ्य है कि उक्त दरगाहें एवं मजारें केजीएमयू की स्थापना से कई सदियों पूर्व की हैं। हजरत हाजी हरमैन जी की दरगाह की नींव लगभग 15वीं सदी (1426 ई.) में रखी गई थी, जबकि केजीएमयू की स्थापना वर्ष 1912-13 में हुई। उस समय नुजूल विभाग द्वारा दरगाहों एवं केजीएमयू परिसर की भूमि का स्पष्ट चौहद्दीकरण भी किया गया था। संबंधित दरगाहें उत्तर प्रदेश वक्$फ बोर्ड में विधिवत दर्ज हैं, जिनका अभिलेख कानूनन अंतिम एवं मान्य माना जाता है।
चन्द्रशेखर ने पाठक को लिखे पत्र में यह भी कहा है कि उच्चतम न्यायालय द्वारा सुदृढ़ किए गए प्लेसेज़ ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविज़न्स) एक्ट, 1991 के अंतर्गत 15 अगस्त 1947 को विद्यमान धार्मिक स्थलों की स्थिति को यथावत बनाए रखना संवैधानिक दायित्व है। साथ ही वक्फ अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत संपत्तियों के संरक्षण का उत्तरदायित्व भी राज्य सरकार पर निहित है।
असपा प्रमुख चन्द्रशेखर ने लिखा डिप्टी सीएम पाठक को पत्र
ऐसी स्थिति में केजीएमयू प्रशासन द्वारा इन ऐतिहासिक मजारों को अवैध बताकर हटाने अथवा क्षति पहुंचाने की किसी भी प्रकार की कार्रवाई न केवल ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत प्रतीत होती है, बल्कि यह संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता, आस्था तथा सामाजिक सौहार्द के मूल सिद्धांतों के भी प्रतिकूल है। अत: आपसे विनम्र अनुरोध है कि केजीएमयू परिसर में स्थित सभी ऐतिहासिक एवं वक्फ में दर्ज दरगाहों/मजारों के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं। किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण या क्षति पहुंचाने वाली कार्रवाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।