सन्तोष आनन्द ने अपने कैरियर के दौरान सौ से अधिक गीतों की रचना

मुहम्मद कमर खां
सन्तोष आनन्द, हिन्दी फिल्मों के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित गीतकार के रूप में स्थापित हैं। सन्तोष आनन्द ने अपने कैरियर के दौरान सौ से अधिक गीतों की रचना की। उनकी रचनाओं को दृष्टिगत रखते हुए सन्तोष आनन्द का नाम भावपूर्ण और काव्यत्मक वालीवुड गीतों को पर्याय बन गया है। उनका जन्म 5 मार्च, 1939 को सिकन्दराबाद में हुआ। इस प्रकार उनकी आयु लगभग 97 वर्ष होने को है। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन के रूप में, लाइबे्ररी साइंस की स्नातक डिग्री प्राप्त की। जिसके बाद दिल्ली में लाइब्रेरियन के रूप में सेवा भी की। इसके साथ ही वह कवि सम्मलेनों में भी भाग लिया करते थे हिन्दी कविता से उनकी निकटता आखिरकार रंग लाई, और इन्हें फिल्म उद्योग में पहला ब्रेक वर्ष 1970 में, फिल्म ’पूुरब और पश्चिम’ में मिला इस क्रम के जारी रहते सन् 1972 में फिल्म शोर में उन्होंने’ एक प्यार का नगमा है’ जैसा सदाबहार गीत लिखा जबकि ’रोटी कपड़ा और मकान, ’प्रेम रोग’ हेतु गीत लिखकर, ’फिल्म फेयर पुरस्कार’ अपने नाम किये। परन्तु व्यक्तिगत जीवन में, गहरे आघात के रूप में बेटे बहू की मृत्यु ने उन्हें भावात्मक स्तर पर तोड़ दिया, फिर भी अपनी पोती के साथ समय व्यतीत करते हुए, वह संगीत व साहित्य से जुड़े रहे।

फिल्म जगत में पहला ब्रेक, उन्हें मनोज कुमार से मुलाकात के बाद उनकी ही फिल्म में वर्ष 1970 में, मिला। जबकि ’पूरवा सुहानी आई रे’ जैसा गीत उन्होनें फिल्म पूरब और पश्चिम के लिए लिखा। इसके अतिरिक्त मशहूुर गीतों के तौर पर ’एक प्यार का नग़मा है’, ’जिन्दगी की न टूटे लड़ी’ ’मोहब्बत है क्या चीज’, ’और नहीं बस और नहीं’ ’तेरा साथ है तो’, आदि जैसी रचनाओं को गीतों में ढाला। वर्ष 1974 में फिल्म ’रोटी कपड़ा और मकान’ हेतु लिखे गीत के लिए, उन्हें पहला फिल्म फेयर आवर्ड मिला। तदेपरान्त फिल्म ’क्रान्ति’, ’प्यासा सावन’, ’प्रेम रोग’ इत्यादि के लिए भी, गीत लिखने का श्रेय उन्हीं को जाता है ।
संतोष आनन्द ने 26 फिल्मों में 108 गाने लिखे हैं, इनमें से कुछ सुरीले उदाहरण इस प्रकार है
1-’एक प्यार का नगमा है’ वर्ष 1972 संगीतकार लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल फि़ल्म शोर।
2-’मंै न भूलूँगा मैं न भूलूँगी’ वर्ष 1974 संगीतकार लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल फिल्म रोटी कपड़ा और मकान।
3-’मेघा रे मेधा रे मत परदेश जा रे’ वर्ष 1981 संगीतकार लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल फि़ल्म प्यासा सावन।
4-’जिन्दगी की न टूटे लड़ी’ वर्ष 1981 संगीतकार लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल फि़ल्म क्रान्ति।
5-’ये गलियॉ ये चैबारा’ वर्ष 1982 संगीतकार लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल फि़ल्म प्रेम रोग
गीत रचना के क्षेत्र में वर्ष 1974 में रोटी कपड़ा और मकान, वर्ष 1983 में फिल्म प्रेम रोग के लिए, सर्वश्रेष्ठ गीतकार का पुरस्कार ग्रहण करने के साथ वर्ष 2016 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ’यश भारती’ पुरस्कार से भी नवाजा गया। वर्ष 2014 में अपने जीवन की भयंकर त्रासदी से उनका सामना हुआ, वर्ष 2014 में उनके पुत्र संकल्प आनन्द व पुत्र बधूं नन्दनी ने ट्रेन के सामने कूद कर, आत्महत्या कर ली, इस त्रासदी के फलस्वरूप वह गहरे सदमे में चले गये। वर्तमान मे संतोष आनन्द अपनी पोती के साथ रह रहे है और जीवन के अन्तिम पड़ाव में अभी साहित्य और संगीत से जुड़े हुए है यह जरूर है कि उनका जीवन शोकग्रस्त और बिखरा हुआ है, उक्त त्रासदी के पश्चात काम की कमी और खर्चे बढ़ जाने के कारण उन्हें बिल वगैरा भुगतान करने में कठिनाई आने लगी है, साथ ही वह आर्थिक तंगी से भी जूझ रहे है इसके अतिरिक्त उनके शरीर पर लकवे का भी कुप्रभाव हुआ फलस्वरूप उनकी दिक्कतें और भी बढ़ गयीं।

हालांकि कई बहुत शानदार गाने उन्होने लिखे, मगर इसके वाबजूद उन्हें काम मिलना कम हो गया। यद्यपि संतोष आनन्द एक धनी व्यक्ति थे। उन्होने, ’एक प्यार का नगमा’ जैसे गाना लिखकर सम्मान कमाया, किन्तु जीवन में झेली हुई त्रासदियों तथा काम की कमी ने उन्हे, भावनात्मक एवं आर्थिक रूप से सर्घषशील बना दिया, जिससें उन्हें गरीबी का सामना करना पड़ा। वर्तमान में गीतकार संतोष आनन्द के परिवार में उनकी पत्नी राजदुलारी, बेटी रिद्धिमा मौजूद है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि संतोष आनन्द के जीवन से आनन्द गायब है।
ये विडम्बना ही है कि जिस गीतकार ने सबको हँसना सिखाया, उस गीतकार की कहानी ने हर किसी के आँखों में आँसू ला दिये। संतोष आनन्द अपनी सरल, भावनात्मक कविताओं के लिए जाने जाते है, उन्होनें राजकपूर और मनोज कुमार जैसे दिग्गजों के साथ काम किया, और दीगर तौर पर भारतीय सिनेमा को कई अमर गीत दिये। जिन्होने हिन्दी फिल्म उद्योग पर गहरी छाप छोड़ी। उनके भावपूर्ण गीत जो अर्थपूर्ण शब्दों से परिपूर्ण है, आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों को छू लेते है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता, गीतकार सन्तोष आनन्द ने वर्ष 2021 में रीयल्टी शो इण्डियन आइडियल-12 से अपनी वापसी की, और फिर से चर्चा में आ गये। उनकी कहानी सुनकर पूरा देश भावुक हो गया संतोष आनन्द आज साहित्य के प्रति अपनी रूचि के साथ, बम्बई में सुरक्षित रूप से अपनी पोती केे साथ रह रहे है।
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता गीतकार संतोष आनन्द ने वालीवुड के इतिहास के कुछ सबसे प्रतिष्ठ गीतों की रखना की है, व्यक्तिगत और आर्थिक कठिनाईयों के वाबजूद सिनेमा के अन्तर्गत गीत रचना में उनका योगदान अतुनीय रहा। सामाजिक मुद्दों पर प्रकाश डालने वाली ’रोटी कपड़ा और मकान’ फिल्म का ’महगाई मार गयी’ जैसा गीत अपने समय में बहुत प्रचलित रहा। अपनी सफलता के बावजूद संतोष आनन्द को अपने जीवन के अन्तिम दौर में गम्भीर आर्थिक कठिनाईयों से जूझना पड़ा रहा है। व्यक्तिगत त्रासदियों के कारण वह एक अर्से तक वालीवुड से दूर हो गये।
हालाकि वर्ष 2021 में इण्डियन आइडियल-12 में उनकी भावुक उपस्थिति ने फिर से उन्हें सुर्खियाँ में ला दिया, दर्शकों व कार्यक्रम के जजों ने सन्तोष आनन्द को सम्मान और अपना समर्थन दिया जिससें सोशल मीडिया पर उनका नाम ट्रेन्ड होने लगा। सन्तोष आनन्द के गीत महज बोल नही है ये बोल जीवन का सबक एवं भावाएं है। इनके शब्द वालीवुड के संगीत पे्रेमियों में बसे हुए हैं जो इस बात का प्रमाण है कि भावनाओं की अभिव्यक्ति वह सच्ची कला है जो कभी मिटती नही है उनके गीत हिन्दुस्तानी संगीत का अभिन्न अंग बने रहेगे, संतोष आनन्द के गीत वालीवुड के स्वर्णिम युग का हिस्सा बने रहेंगे, उनकी काव्य प्रतिभा आने वली पीढिय़ों के लिए अमर और अमिट रहेगी।