सपा में शामिल हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में रविवार को सपा मुख्यालय में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की मौजूदगी में नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने सपा का दामन थाम लिया। पहले से ही यह तय हो गया था कि नसीमुद्दीन सपा में जाएंगे। आज इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी गई। मालूम हो कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। पार्टी में उनका अच्छा रसूख था। इस मौके पर तीन महिला नेत्रियों समेत कई नेता सपा में शामिल हुए।

शंकराचार्य मुद्दे पर बोले अखिलेश, योगी ने जब मुंह खोला तो बुरा बोला’
इस मौके पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तंज कसा कि आज हमारे पास फूल आ गए हैं, तो किसी का फूल मुरझाता जा रहा है। राजकुमार पाल के आने से हमारे श्यामलाल पाल और मजबूत होने जा रहे हैं। कुछ लोग शंकराचार्य को भी अपमानित कर रहे। उनके साथ हम लोग हैं। शंकराचार्य शंका से परे होते हैं। इनकी भाषा ऐसी है, जब ‘मुंह खोला… तब बुरा बोला’। जो लोग अधिकारियों के माध्यम से दूसरों के सर्टिफिकेट मांग रहे हैं, उनके सर्टिफिकेट कहां हैं। सपा प्रमुख ने सीएम का नया मतलब बताया। उन्होंने कहा कि आजकल सीएम का मतलब करप्ट माउथ भी है। आज दिल्ली और लखनऊ दोनों जगह की हवा खराब है। तंज कसा कि हमारे मुख्यमंत्री विष्ट जी खिलाड़ी तो हैं, लेकिन खेल नहीं पा रहे हैं। जब से भाजपा सरकार आई है तब से मंझा और गांजा बहुत पकड़ा जा रहा है। एक जगह जनसुनवाई में सांड घुस गया।

जब से भाजपा सरकार आई है तब से मंझा और गांजा बहुत पकड़ा जा रहा
समाजवादी पार्टी में शामिल होने पर पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव से मेरे पुराने रिश्ते हैं। मैं उनकी बहुत इज्जत करता हूं। हम उनके बताए रास्ते पर चलेंगे। मेरे शामिल होने से पहले पार्टी में और भी कई सीनियर नेता हैं। हमें उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर पार्टी को मजबूत करना है। पार्टी मजबूत होगी तो हम मजबूत होंगे। हम मजबूत होंगे तो प्रदेश मजबूत होगा। प्रदेश मजबूत होगा तो समाज मजबूत होगा। इस मौके पर नसीमुद्दीन ने कहा कि देश में पहली बार बेरोजगारी भत्ता अखिलेश यादव ने दिया। पहला बार छात्रों को लैपटॉप इन्होंने दिया। युवाओं को नौकरी सपा ने दी। आज एक नौकरी लेना बड़ा मुश्किल है। बीच-बीच में शेरो-शायरी पढक़र माहौल बनाया। अंत में जय समाजवाद कहकर उन्होंने अपनी बात पूरी की।

सपा को मिला एक मुस्लिम चेहरा
नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सपा में आने के बाद पार्टी को एक मजबूत मुस्लिम चेहरा मिल गया है। आजम खां के लगातार जेल में रहने के बाद पार्टी के पास जमीनी रूप से जुड़ा ऐसा कोई चेहरा नहीं था। राजनीतिक जानकारों के अनुसार इससे सपा को लाभ मिलने की उम्मीद है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी कद्दावर नेता माने जाते हैं। इससे पहले बसपा की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। उनका राजनीतिक अनुभव और पकड़ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मजबूत मानी जाती है। कांग्रेस छोड़ने के बाद प्रदेश या केंद्रीय नेतृत्व ने उनके जाने पर किसी भी तरह की टिप्पणी नहीं की थी।