दस हजार लोगों को भोजन कराने की हैसियत न होने पर लड़कियों का टल जाता था निकाह
कमल जयंत
आल इंडिया मुस्लिम घोसी एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मो. वसीक का कहना है कि हमारे समाज में एसोसिएशन न होने की वजह से घोसी समाज में तमाम तरह की कुप्रथाएं प्रचलित थीं। जिसका सबसे ज्यादा नुकसान समाज के गरीब तबके को उठाना पड़ता था। वैसे भी इस समाज में काफी गरीबी है। दूध का कारोबार करके ये समाज अपने परिवार का जीवन-यापन करता है। इस काम में जरूरत से ज्यादा मेहनत होने के कारण परिवार के सभी सदस्य मिलकर काम करते हैं, जिसकी वजह से घोसी समाज के लोग अपने बच्चों को भी नहीं पढ़ा पाते हैं। साथ ही लड़कियों का निकाह करने के लिए लडक़ी वालों को पूरी बिरादरी का खाना करना पड़ता था। ऐसे में दस हजार लोगों की दावत देने में असमर्थ लोगों की लड़कियों के निकाह नहीं हो पाते थे। घोसी समाज के संगठन आल इंडिया मुस्लिम घोसी एसोसिएशन ने समाज में पंचायत बुला-बुलाकर इस तरह की कुरीतियों को दूर कराने में सफलता पायी है।

शिक्षा के अभाव के चलते मुस्लिम घोसी समाज में काफी कुप्रथाएं भी बढ़ीं
शिक्षा के अभाव के चलते इस समाज में काफी कुप्रथाएं भी बढ़ गयीं। इन कुप्रथाओं का नुकसान समाज के हर वर्ग को उठाना पड़ता था। वसीक ने एक सबसे खराब कुप्रथा का हवाला देते हुए बताया कि पहले घोसी समाज में अगर कोई अपनी लडक़ी का निकाह (विवाह) करना चाहता था तो उसे पहले बारात में आने वाले दस हजार बारातियों के भोजन की व्यवस्था करनी होती थी। अगर गरीबी के कारण कोई व्यक्ति दस हजार लोगों की बारात को खाना खिलाने में असमर्थ है तो उनके बेटियों की शादियां नहीं हो पातीं थीं। इस तरह कई अन्य कुप्रथाएं भी समाज में प्रचलित थीं। दहेज तो हर समाज में है, दस हजार बारातियों के भोजन का इंतजाम, इसके बाद दहेज की मार से व्यक्ति टूट जाता था। इस सामाजिक मुद्दे पर हमारी संस्था जो मुस्लिम घोसी समाज की सर्वमान्य संस्था है।
संस्था के जरिए इन कुरीतियों के खिलाफ अभियान चलाया गया, संस्था से जुड़े लोगों ने खुद पहल करके दस हजार बारातियों के भोजन कराने की व्यवस्था का विरोध किया और यह व्यवस्था दी कि लडक़े वाले अधिकतम पांच सौ से ज्यादा बाराती नहीं ले जाएंगे। उनका कहना है कि उन्हें इस बात की खुशी है कि समाज ने उनकी संस्था द्वारा बिरादरी के हित में दी गयी व्यवस्था को स्वीकार किया। अब गरीब व्यक्ति भी अपनी बेटी का आसानी से निकाह कर रहे हैं। हमारी संस्था ने ये भी व्यवस्था दी कि अगर कोई अपनी लडक़ी को किसी भी तरह का कोई उपहार (दहेज) देगा तो उसे छिपाकर देगा उस उपहार का प्रदर्शन नहीं करेगा। ताकि समाज में इसका कोई दुष्प्रभाव न पड़े।