संविधान बचाने की रैली रद्द करने की तैयारी, हिन्दू राष्ट्र बनाने की यात्रा जारी
नई दिल्ली। दलित, ओबीसी, माइनॉरिटीज और आदिवासी संगठनों का परिसंघ (डोमा परिसंघ) पूर्व सांसद और राष्ट्रीय चेयरमैन-डॉ. उदित राज ने कहा कि आज प्रेस वार्ता के माध्यम से देशवासियों को संविधान दिवस की शुभकामनाएँ दी और कहा कि एक तरफ़ संविधान दिवस मनाया जा रहा है तो दूसरी तरफ़ सत्ता में बैठी शक्तियां इसे कमजोर करने में लगी हैं। ऐसा प्रमाणित भी हो रहा है। डोमा परिसंघ ने 30 नवंबर को दिल्ली की रामलीला मैदान में संविधान और वोट बचाने की रैली करने का निर्णय लिया था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने एनओसी देने से इनकार कर दिया।

संविधान बचाने की रैली रद्द करने का मतलब हिंदू राष्ट्र बनाने की साज़िश। सरदार पटेल ने ‘हिन्दू राज’ के विचार को ‘पागलपन’ कहा था लेकिन उनके विचारों के ठीक विपरीत मोदी सरकार कर रही है। एक तरफ़ संविधान बचाने के आंदोलन पर प्रतिबंध लगाने का कृत्य किया जा रहा है तो दूसरी तरफ़ संविधान ख़त्म करने की साज़िश। धीरेंद्र शास्त्री को उसी तरह से पीछे से बीजेपी और आरएसएस समर्थन कर रहे हैं जैसे अन्ना आंदोलन को किया था। अन्ना आंदोलन के द्वारा फर्जी भ्रष्टाचार का भ्रम फैला कर कांग्रेस की सरकार को बेदखल किया था और उसी तरह से अपने पालतू – धीरेंद्र शास्त्री, रामभद्राचार्य सहित कुछ मीडिया के द्वारा षड्यंत्र कराया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि मोदी सरकार ने निजीकरण और ठेकेदारी प्रथा से बहुत सीमा तक आरक्षण को खत्म कर दिया है। सरकारी प्रतिष्ठानों और विभागों को औने पौने कीमत पर बेच दिया ताकि सरकारी नौकरी रहे हीं न। लेटरल एंट्री के द्वारा बिना आरक्षण के आईएएस बनाने का कार्य इसी सरकार ने किया। संविधान की धारा 15(5) को न लागू करके अच्छी और गुणवत्ता वाली शिक्षा से दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और आदिवासी को वंचित कर दिया है। धर्मांतरण के नाम पर ईसाइयों और मुसलमानों को निरंतर प्रताड़ित किया जा रहा है । जबसे EWS लागू हुआ है, तबसे ज्यादातर नौकरियाँ उनको ही मिल रहीं जो पहले से विकसित थे। जिन पदों पर आरक्षण नहीं है, जैसे कुलपति, उच्चन्यायपालिका और अन्य प्रमुख विभाग वहां केवल आरएसएस की सोच वालों को रखा जा रहा है। लाखों पद खाली पड़े हैं लेकिन सरकार नहीं भर रही और आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम कराया जा रहा है।
सरदार पटेल ने ‘हिन्दू राज’ के विचार को ‘पागलपन’ कहा था
सुप्रीम कोर्ट ने ‘धर्म सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार’ मामले में आउटसोर्सिंग को शोषण का साधन मानते हुए विभिन्न विभागों में संविदा पर कार्य कर रहे लगभग 11 लाख कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश दिया था, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद संविदा कर्मचारियों को नियमित करने के बजाय उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सर्विस निगम लिमिटेड बनाया है। यह निगम ₹16,000-₹20,000 के सीमित वेतन पर कर्मचारियों को रखेगी और हमेशा के लिए सरकारी नौकरी का रास्ता बंद कर दिया है। हम किसी भी कीमत पर संविधान बचाने का कार्यक्रम करेंगे।