बिहार में हार के बाद भी इंडिया गठबंधन ने ओवैसी से बनायी दूरी

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ओवैसी के साथ आने से इंडिया गठबंधन के पक्ष में मुस्लिमों के एकजुट होने से  हिंदुओं का भाजपा के पक्ष में एकजुट होने का ज्यादा खतरा

कमल जयंत

एआईएमआईएम प्रमुख अससुद्दीन ओवैसी पिछली बार की तरह इस बार भी बिहार में पांच सीटें जीतने में सफल रहे। उन्होंने चुनाव के पहले महागठबंधन में शामिल होने की पेशकश की और कहा कि वह भाजपा को शिकस्त देने के लिए महागठबंधन में दो सीटों पर भी चुनाव लडऩे के लिए तैयार हैं, लेकिन महागठबंधन (राहुल गांधी- तेजस्वी यादव) को यह लग रहा था कि ओवैसी से गठबंधन करने का उन्हें नुकसान होगा और भाजपा महागठबंधन के खिलाफ ओवैसी के विरोध में हिन्दुओं को एकतरफा अपने पक्ष में गोलबंद करने में सफल हो जाएगी। फिलहाल महागठबंधन ने ओवैसी से चुनाव में दूरी बनाये रखी और उनके साथ किसी भी तरह का कोई चुनावी गठबंधन नहीं किया। महागठबंधन का यह फैसला भविष्य की सियासी रणनीति को देखते हुए सहीं भी हो सकता है। क्योंकि एक बार ओवैसी से गठबंधन करके चुनाव लडऩे पर भाजपा हर राज्य में इंडिया गठबंधन के खिलाफ इसी मुद्दे को अपना मुख्य हथियार बनाएगी। एक साल बाद देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने हैं।

यूपी में भी इंडिया गठबंधन समान विचारधाराओं वाले दलों को साथ लेकर चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहा है। लेकिन गठबंधन के नेताओं का अब भी यही मानना है कि ओवैसी को शामिल करने का इंडिया गठबंधन को फायदा कम नुकसान ज्यादा होगा और भाजपा के साथ बने एनडीए गठबंधन को ही इसका ज्यादा फायदा होगा। यही वजह है कि ओवैसी द्वारा बिना किसी शर्त के इंडिया गठबंधन में आने की पहल को ये नेता स्वीकार करने से कतरा रहे हैं। हालांकि जम्मू-कश्मीर में भाजपा पीडीपी के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ चुकी है और उनके साथ सरकार में भी शामिल रही है, लेकिन विपक्ष इसे चुनाव में भाजपा के खिलाफ आजतक मुद्दा नहीं बना सका है। हालांकि बिहार में ओवैसी ने सीमांचल क्षेत्र की कुछेक सीमित सीटों पर ही चुनाव लड़ा था, लेकिन अकेले दम पर पांच सीट हासिल करना इसे ओवैसी की सफलता ही कहा जाएगा।

बिहार में ओवैसी ने भी बरकरार रखा पार्टी का जनाधार

यूपी के जो सियासी हालात हैं, उसके मुताबिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश की लगभग सौ सीटें मुस्लिम बहुल हैं। यहां दलित-पिछड़ा और मुस्लिम गठजोड़ काफी प्रभावी भी है। पिछले लोकसभा चुनाव में इसका असर नतीजों में भी दिखा था। बिहार के नतीजों से उत्साहित ओवैसी यूपी में भी अपने प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारेंगे। ऐसे में देखना यह होगा कि इंडिया गठबंधन खासतौर पर राज्य में मुस्लिम मतों को बंटने से रोक पाने में कितना सफल हो पाएगा। हालांकि पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव के नतीजों पर नजर डालें तो यूपी में विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोट एकतरफा सपा और लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के प्रत्याशियों के पक्ष में पूरी तरह से गोलबंद हुआ था। इडिया गठबंधन को आने वाले विधानसभा चुनाव अपने इस मजबूत जनाधार को बचाये रखने की चुनौती होगी।

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