दलित उत्पीड़न के गंभीर मामलों में अभियुक्तों पर लगे यूएपीए : बीपी अशोक

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दलितों पर हो रहे अत्याचार रोकना सरकार की जिम्मेदारी

कमल जयंत

लखनऊ। पॉलिटिकल जस्टिस पार्टी के संस्थापक एवं पूर्व आईपीएस डॉ. बीपी अशोक का कहना है कि वंचित समाज को न्याय दिलाने और उन्हें संविधान प्रदत्त उनके अधिकार दिलाने के लिए जरूरी है कि आप सत्ता में भागीदार हों और सत्ता हासिल करने या इसमें भागीदार बनने के लिए चुनाव की राजनीति में आना जरूरी होता है। इसीलिए राजनीतिक दल का गठन किया और बहुजनों के हक की लड़ाई लड़ रहे चन्द्रशेखर आजाद की पार्टी असपा के साथ गठबंधन किया। यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में हमारी पार्टी असपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी।


डॉ. बीपी अशोक का कहना है कि एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक देश में एक दिन में सत्तर हजार से अधिक दलित उत्पीडऩ की घटनाएं होती हैं, लेकिन सरकारें दलित उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने के लिए संजीदा नहीं हैं। ये सरकारें यही साबित करने में लगी रहती हैं कि दलित उत्पीडऩ एक्ट का दुरुपयोग हो रहा है। यूपी में तो दलित उत्पीडऩ की घटनाएं बहुत ज्यादा हैं, यहां रोजाना उत्पीड़न की दो सौ घटनाएं होती हैं। गंभीर दलित उत्पीड़न की घटनाओं पर सरकारों को यूएपीए और एनएसए के तहत कार्रवाई करनी होगी, तभी दलितों के साथ हो रहे जघन्य अपराधों पर अंकुश लगेगा। बिहार के दरभंगा में सामूहिक दलित उत्पीड़न की घटना हुई। इस तरह की घटनाओं पर तभी विराम लगेगा जब उत्पीडऩ करने वालों पर सख्त और प्रभावी कार्रवाई होगी।
यूजीसी के मुद्दे पर उनका कहना है कि दरअसल यूजीसी रेगुलेशन लागू हों, इससे पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। फिलहाल मामला कोर्ट में है और इस पर उसका फैसला आना बाकी है, लेकिन यूजीसी को लागू करने के लिए उसमें समता समिति गठित करने का प्रावधान है। सरकार इस समिति में कम से कम पांच सदस्य दलित और पिछड़ा वर्ग समाज से रखे। क्योंकि अभी इसमें जो प्रावधान है उसके मुताबिक एक एससी, एक एसटी और एक पिछड़ा वर्ग तथा एक दिव्यांग व एक महिला को सदस्य रखने का प्रावधान है। जबकि महिला और दिव्यांग के नाम पर भी समिति में सवर्णों को ही रख लिया जाएगा। ऐसे में दस सदस्यीय समिति में अध्यक्ष मिलाकर सात सदस्य सवर्ण हो जाएंगे और फिर दलित व पिछड़ा वर्ग के छात्रों द्वारा की जाने वाली उत्पीडऩ व अन्याय की शिकायत पर उन्हें इस समिति से कोई न्याय नहीं मिल पाएगा, क्योंकि उनकी शिकायत सवर्णों के खिलाफ होगी और जांच भी सवर्ण ही करेंगे।

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