निकहत जरीन ने रचा इतिहास

Share

विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल में भारत को गोल्ड

विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल्स 2025 में भारतीय बॉक्सर्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी 20 भार वर्ग में पदक जीतकर इतिहास रच दिया। निकहत जरीन, जैस्मिन लेंबोरिया और अन्य महिला मुक्केबाजों ने 7 गोल्ड जीतकर देश का मान बढ़ाया, जबकि पुरुष वर्ग ने 2 गोल्ड अपने नाम किए. भारत का कुल पदक तालिका में 9 स्वर्ण शामिल रहे। भारत ने विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल्स 2025 में शानदार प्रदर्शन करते हुए दुनिया को अपना दमखम दिखाया है। नई दिल्ली में हो रहे इस बड़े टूर्नामेंट में भारतीय बॉक्सर्स ने सभी 20 भार वर्ग में पदक जीतकर इतिहास रच दिया। खास बात यह रही कि महिला मुक्केबाजों ने एक बार फिर देश की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए 7 गोल्ड मेडल अपने नाम किए। वहीं देश की स्टार बॉक्सर निकहत जरीन ने अपने शानदार खेल से एक बार फिर साबित कर दिया कि वह दुनिया की सबसे बेहतरीन मुक्केबाजों में से एक हैं।

महिला 51 किलोग्राम भार वर्ग में निकहत जरीन ने खिताबी मुकाबले में चीनी ताइपे की खिलाड़ी झुआन यी गुओ को 5-0 से हराकर गोल्ड मेडल जीता। यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि यह उनकी 2023 विश्व चैंपियनशिप के बाद पहला स्वर्ण पदक है। निकहत पूरे मुकाबले में शानदार फॉर्म में नजर आईं और विरोधी खिलाड़ी को एक भी मौका नहीं दिया। भारत के लिए यह गोल्ड न सिर्फ उनके नाम को और चमकाता है बल्कि युवा खिलाडिय़ों के लिए भी बड़ी प्रेरणा है।
14 जून 1996 को तेलंगाना के निज़ामाबाद में जन्मी निकहत जरीन एक साधारण परिवार से निकलकर आगे बढ़ीं और भारतीय मुक्केबाजी इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया। तीन बहनों के साथ एक रूढि़वादी मुस्लिम परिवार में पली-बढ़ीं निकहत जरीन को उनके पिता मोहम्मद जमील अहमद ने खेलों से रूबरू कराया था। शुरुआत में रेसिंग के बाद, निकहत के\ करियर में एक नया मोड़ आया। उन्होंने एक स्थानीय स्टेडियम में बॉक्सिंग में लड़कियों के शामिल नहीं होने पर सवाला उठाया और इस धारणा को बदलने के लिए चुनौती दी कि मुक्केबाजी सिर्फ लडक़ों का खेल नहीं है। जल्द ही निकहत ने रेसिंग के ट्रैक से बॉक्सिंग रिंग में कदम रखा। उन्होंने शुरुआत में अपने पिता के साथ ट्रेनिंग ली। पुरुषों वाले स्थानीय जिम में, वह अपने कौशल को निखारने के लिए लडक़ों के साथ प्रतिस्पर्धा करती थीं। इसके बाद वह विशाखापट्टनम में भारतीय खेल प्राधिकरण (स््रढ्ढ) में शामिल हो गईं, जहां उन्होंने द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता आईवी राव के मार्गदर्शन में अपनी ट्रेनिंग को जारी रखा। 2009 में, निकहत की प्रतिभा तब सामने आई जब उन्होंने सब-जूनियर नेशनल खिताब जीता और बाद में 2011 में जूनियर और यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके तीन साल बाद, वह यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में एक और रजत पदक जीतने में सफल रहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *