बसपा अपना आधार वोट भी बचा पाएगी, यह कहना मुश्किल : फतेह बहादुर

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मायावती की नीतियों के कारण बहुजन समाज बसपा से अलग हो गया

कमल जयंत

लखनऊ। सामाजिक संस्था बहुजन भारत के अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस कुंवर फतेह बहादुर का कहना है कि दुर्भाग्यवश मायावती जी की नीतियों के कारण बहुजन समाज पूरी तरह से बसपा से अलग हो चुका है। यही वजह है कि यूपी में पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा महज एक सीट पर ही सिमट गयी। लोकसभा में पार्टी शून्य है। बसपा का गठन बहुजन समाज को जोडऩे के लिए हुआ था।

कांशीराम जी जानते थे पिछड़ा वर्ग को जोड़े बगैर बहुजन आंदोलन कभी भी सफल नहीं होगा

मायावती जी ने कांशीराम जी के बहुजन मूवमेंट को सर्वजन का मूवमेंट बना दिया। जिसकी वजह से बसपा का मूल काडर पार्टी से अलग हो गया है। इन्हें पार्टी में वापस जोडऩे की कोई मुहिम नहीं चल रही है। ऐसे में बसपा अपना आधार वोट बैंक भी बचा पाएगी, यह कहना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि कांशीराम जी इस सदी के महानायक हैं, उनकी सोच और विचारधारा स्पष्ट है। बहुजनों को जोडऩे के लिए उन्होंने बहुजन समाज पार्टी का गठन किया, लेकिन उन्हें एक बात अच्छी तरह से मालूम थी कि जबतक उनके इस आंदोलन में पिछड़ा वर्ग नहीं जुड़ेगा, उनका आंदोलन कभी सफल नहीं होगा। भारतीय समाज में शुरू से ही 85 बनाम 15 फीसदी का संघर्ष चलता रहा है। कांशीराम जी ने इन्हीं 85 फीसदी लोगों को एकजुट करके देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में चार बार बसपा की सरकार गठित की और इन वर्गों को संविधान विरोधी ताकतों से मुक्ति दिलायी। बहुजनों में जागरुकता पैदा करने के लिए कांशीराम जी ने नारे दिये जो बहुजन की बात करेगा वह दिल्ली में राज करेगा। वोट हमारा राज तुम्हारा नहीं चलेगा। जिसकी जितनी संख्या भारी उतनी उसकी हिस्सेदारी। सपा इन्हीं मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है।

बहुजन नायक ने मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू कराने के लिए लम्बा आंदोलन चलाया 

इसीलिए उन्होंने नब्बे के दशक में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने के लिए बनायी गयी मंडल आयोग की रिपोर्ट को लागू कराने के लिए दिल्ली के बोट क्लब पर लंबे समय तक धरना दिया। मंडल आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद पिछड़ा वर्ग को भी आरक्षण का लाभ मिलने लगा तो वह दलितों के आरक्षण का विरोध करने के बजाए उनके आंदोलन के साथ जुडऩे लगा। लेकिन मायावती जी ने बहुजन आंदोलन से जुड़े लोगों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। बुनियादी अंतर यह है कि कांशीराम जी ने बहुजन समाज को जोड़ा और मायावती जी की वजह से बहुजन समाज ने बसपा से नाता तोडऩा शुरू किया।

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