सभी पर कृपालु होते हैं देवाधिदेव महादेव

शिवचरण चौहान
भारत भर में सभी प्रमुख शिव मंदिरों में महाशिवरात्रि का पर्व हर वर्ष बहुत हर्ष और उत्साह के साथ मनाया जाता है। साल भर में शिवरात्रि के बारह पर्व होते हैं। किंतु फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। मार्कंडेय पुराण के अनुसार शिव, विष्णु इंद्र वरुण अग्नि आदि देवताओं से तेज लेकर महाशक्ति दुर्गा का निर्माण किया गया था। दुर्गा बुद्धि हैं, प्रकाश है और अंधकार भी हैं। भगवान शिव की अलौकिक तेज से दुर्गा का मुख् मंडल बना है । वह यमराज की बहन हैं। मधु -कैटभ और महिषासुर मर्दिनी हैं।
देवाधिदेव शिव ने अपने श्वसुर सती के पिता का घमंड उनका सिर काट कर चूर कर दिया था। भगवान शिव रम्य कृष्ण की तरह अवतार नहीं लेते। वह भेष बदलकर भक्तों का दुख दूर करने आते हैं। उनके 11 वें रुद्र का स्वरूप है हनुमान जी। किरातार्जुनीयम् में वह किरात बनकर अर्जुन का घमंड चूर कर देते हैं और उन्हें आशीर्वाद भी देते हैं। गणेश और कार्तिकेय उनके दो पुत्र हैं। गणेश उत्तर कार्तिकेय दक्षिण के देवता हैं। भगवान शिव का वाहन नंदी है तो गणेश का मूषक और कार्तिकेय का मोर। शमशान वासी शिव। भूत प्रेत पिशाचों के देवता है तो मनुष्य और देवताओं की भी यक्ष, गंधर्व किन्नर उनके उपासक हैं। दुनिया भर में सबसे ज्यादा शिव मंदिर ही हैं।

भगवान शिव को कहीं भी स्थापित किया जा सकता है। शालिग्राम से लेकर लिंग के रूप में उनकी पूजा कहीं भी की जा सकती है। भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में उज्जैन का महाकाल मंदिर भक्तों का प्रिय मंदिर है। नेपाल का पशुपतिनाथ पाकिस्तान का कटाक्ष राज और भारत का उज्जैन का महाकाल बहुत पवित्र धाम माने जाते हैं। इन सभी स्थानों पर महाशिवरात्रि पर बड़े बड़े आयोजन होते हैं जहां पर भक्त आस्था और श्रद्धा के कारण रात भर जागकर पूजन अर्चन करते हैं। महादेव एकमात्र ऐसे देवता हैं जो बहुत कम साधना में प्रसन्न हो जाते हैं। मृत्यु से भी बचा लेते हैं और संकट से भी उबार लेते हैं। उनका पंचाक्षरी मंत्र ओम नम: शिवाय बहुत फलदाई है।
शिव महापुराण शिव पुराण स्कंद पुराण से लेकर अनेकानेक पुराणों में उनकी कथाएं हैं। श्रीमद् भागवत जब भगवान शिव पार्वती को सुनाते हैं तो अमर कथा बन जाती है। राजा परीक्षित भागवत कथा सुनकर मोक्ष प्राप्त किया था। राम और कृष्ण भगवान शिव के प्रिया है। कृष्ण का बाल रूप और राम का बाल रूप देखने के लिए शिव गोकुल अयोध्या तक आते हैं। कुमारसंभव में कालिदास ने लिखा है की पार्वती ने कठोर तप करके शिव को प्राप्त किया था किंतु मनुष्य भगवान शिव का भजन करके ही उनकी कृपा प्राप्त कर सकता है। देवाधिदेव महादेव भोले भंडारी हैं। उनकी कृपा आसानी से प्राप्त की सकती है। बालू की शिवलिंग बनाकर फूलने पर शिव अति शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। नमामि शिव नमामि शिव नमामि भक्तवत्सलम।।