यूपी में संविधान और आरक्षण बचाने की लड़ाई लड़ रहे दलों के साथ है आजाद समाज पार्टी
कमल जयंत
आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्रशेखर आजाद ने उत्तर प्रदेश में एक साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से पार्टी की चुनावी रणनीति तैयार करना शुरू कर दी है। चन्द्रशेखर आजाद बहुजन नायक कांशीराम जी की विचारधारा से काफी प्रभावित हैं। यही वजह है कि उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी का नाम आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) रखा है। चन्द्रशेखर आजाद कांशीराम जी की जयंती के मौके पर 15 मार्च 2026 को अपनी पार्टी के चुनाव अभियान की विधिवत शुरुआत करेंगे। पार्टी प्रमुख का मकसद इस बार यूपी में बैलेंसिंग आफ पावर बनना है। इसका मतलब साफ है कि राज्य में असपा के सहयोग के बिना किसी भी दल की सरकार न बन सके। उनका मानना है कि अगर राज्य में उनके सहयोग से सरकार बनती है तो वह उनके दलित, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज के एजेंडे को सत्ता में रहने वाला दल नकार नहीं सकेगा।

असपा की नीतियों और पार्टी की भावी रणनीति पर उत्तर प्रदेश आजाद समाज पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता देव प्रताप सिंह ने बताया कि यूपी में अब विधानसभा चुनाव होने में एक साल ही बचा है। असपा कांशीराम जी के जन्मदिन के मौके पर 15 मार्च 2026 को राज्य की राजधानी लखनऊ में एक बड़ी रैली करने जा रही है। पार्टी प्रमुख चन्द्रशेखर आजाद इस रैली के जरिए यूपी में चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे। वर्ष 2027 की शुरुआत में ही राज्य में विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में अब चुनाव की तैयारियों के लिए महज एक साल ही बचा है। उनका कहना है कि पार्टी का मकसद राज्य से मनुवादी व्यवस्था की पोषक भाजपा सरकार को सत्ता से अपदस्थ करना है। इसके लिए पार्टी संविधान और आरक्षण बचाने की लड़ाई लड़ रहे दलों के साथ तालमेल करके चुनाव लड़ेगी।
आजाद समाज पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता देव प्रताप सिंह का कहना है कि यूपी में अब विधानसभा चुनाव होने में एक साल ही बचा है। असपा कांशीराम जी के जन्मदिन के मौके पर 15 मार्च 2026 को राज्य की राजधानी लखनऊ में एक बड़ी रैली करने जा रही है। पार्टी प्रमुख चन्द्रशेखर आजाद इस रैली के जरिए यूपी में चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे। वर्ष 2027 की शुरुआत में ही राज्य में विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में अब चुनाव की तैयारियों के लिए महज एक साल ही बचा है। उनका कहना है कि पार्टी का मकसद राज्य से मनुवादी व्यवस्था की पोषक भाजपा सरकार को सत्ता से अपदस्थ करना है। इसके लिए पार्टी संविधान और आरक्षण बचाने की लड़ाई लड़ रहे दलों के साथ तालमेल करके चुनाव लड़ेगी।

हालांकि पार्टी ने राज्य की सभी 403 विधानसभा सीटों पर तैयारी कर रखी है और इन सभी सीटों पर संभावित प्रत्याशी भी तय कर रखे हैं। लेकिन पार्टी का मकसद मनुवाद को जड़ से उखाड़ फेंकना है, इसलिए हमारी पार्टी की पहली प्राथमिकता राज्य में संविधान समर्थक दलों के साथ तालमेल करके चुनाव लडऩा है। उनका कहना है कि रैली का नाम संवैधानिक अधिकार बचाओ, भाईचारा बनाओ रखा गया है। उनका कहना है कि 15 सूत्रीय मुद्दों पर रैली में चर्चा होगी, जिसमें सरकारी जमीनों को कुछेक पूंजीपतियों के देने के बजाए इस संपदा पर बहुजनों की भी भागीदारी होनी चाहिए। इसी तरह बिजली के बिल में गरीबों को सब्सिडी देने की मांग भी शामिल है। ताकि सरकार वंचितों को बिजली में सब्सिडी दे, जिससे वे छोटे-छोटे रोजगार के लिए बिजली के उपयोग से बढऩे वाले भार को सब्सिडी के जरिए वहन कर सकें। देव प्रताप सिंह से राज्य के मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक हालात पर विस्तार से बातचीत हुई। असपा के प्रदेश प्रवक्ता ने सभी सवालों का बहुत ही बेबाकी के साथ जवाब दिया।
सवाल- असपा ने कांशीराम जी की जयंती के मौके पर ही राज्य स्तरीय रैली का आयोजन क्यों किया। इसके पीछे पार्टी का क्या मकसद है।
जवाब- पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्रशेखर आजाद जी ने बहुजन नायक कांशीराम जी के विचारों से प्रेरित होकर ही आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) का गठन किया है। इसलिए उनकी कोशिश रहती है कि वह हर अच्छे काम की शुरुआत कांशीराम जी की जयंती से ही करें। कांशीराम जी ने बहुजन समाज जिनमें दलित, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज शामिल है। इन्हें सामाजिक और राजनीतिक अधिकार दिलाने के लिए लंबा आंदोलन चलाया और 85 फीसदी बहुजन समाज को एकजुट करके देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में एक बार नहीं बल्कि पांच बार सरकार बनायी। कांशीराम जी के संघर्ष से प्रेरणा लेकर ही चन्द्रशेखर जी ने उनकी जयंती के मौके पर रैली के जरिए राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव के अभियान की शुरुआत करने का फैसला लिया है।
सवाल- बहुजनों की लड़ाई तो बसपा भी लड़ रही है, ऐसे में अलग-अलग मैदान में रहने से बहुजनों का नुकसान नहीं होगा।
जवाब- असपा प्रमुख चन्द्रशेखर जी ने कई बार बसपा अध्यक्ष मायावती जी से मिलकर आंदोलन चलाने की पहल और आग्रह दोनों किया, लेकिन वह साथ में काम करने के लिए सहमत नहीं हैं। ऐसी स्थिति में हमारी पार्टी जो कांशीराम जी के बनाये सिद्धांतों का अनुसरण करती है। उन्हीं के आदर्शों पर चलकर बहुजनों के खिलाफ हो रहे अन्याय व उत्पीडऩ के मुद्दे पर सडक़ पर है और उन्हें न्याय दिलाने के लिए हर जिले में आंदोलन चला रही है। पार्टी धरना-प्रदर्शन के माध्यम से शोषितों को पार्टी से जोडऩे का भी प्रयास कर रही है। पार्टी अध्यक्ष के प्रयासों को काफी हदतक सफलता भी मिल रही है। यही कारण है कि देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में बहुत ही कम समय में पार्टी का जनाधार मजबूत हो रहा है।
सवाल- आपकी पार्टी यूपी में कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
जवाब- पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भीम आर्मी प्रमुख चन्द्रशेखर आजाद जी ने जिलों के दौरे करने शुरू कर दिये हैं और उनकी नजर पार्टी के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले कार्यकर्ताओं पर है। वे सक्रिय कार्यकर्ताओं को ही विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाना चाहते हैं। ताकि जमीन पर काम कर रहे कार्यकर्ताओं का मनोबल बना रहे और वह राज्य में खासतौर पर अपने जिले व क्षेत्र में होने वाली किसी भी दलित उत्पीडऩ की घटनाओं पर धरना-प्रदर्शन और आंदोलन के जरिए पीडि़तों को न्याय दिलाने में सहायक हो सकें।
सवाल- इस बार आपकी पार्टी राज्य में किसी दल के साथ तालमेल करके चुनाव लड़ेगी या अकेले ही मैदान में ताल ठोकेगी।
जवाब- असपा ने राज्य की सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लडऩे की तैयारी कर रखी है। लेकिन यूपी में मनुवादी ताकतों को शिकस्त देने के लिए पार्टी प्रमुख चन्द्रशेखर जी राज्य में संविधान और आरक्षण बचाने की लड़ाई लड़ रहे दलों के साथ मिलकर चुनाव लडऩा चाहते हैं। असपा का मकसद इस चुनाव में यूपी में बैलेंसिंग आफ पावर बनना है। ताकि हमारी मर्जी के बगैर किसी भी दल की यूपी में सरकार न बन सके। हमारी पार्टी का मकसद इस बार यूपी में मान्यता प्राप्त दल बनना है। बहुजन समाज के लोग हमारे आंदोलनों से तेजी के साथ जुड़ रहे हैं। ऐसे में हमें उम्मीद है कि वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में हमारी पार्टी को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल का दर्जा हासिल कर सके ।

सवाल- राज्य में दलितों पर हो रहे अत्याचार और उत्पीडऩ के मुद्दे पर आपकी पार्टी कोई आंदोलन चला रही है।
जवाब- हमारी पार्टी और हमारी पार्टी के अनुशांगिक संगठन भीम आर्मी का गठन ही इस उत्पीडऩ के खिलाफ हुआ है। आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी दोनों मिलकर दलित उत्पीडऩ के मामलों में जमीन पर लड़ाई लड़ रहे हैं। लखनऊ में बुजुर्ग दलित को मंदिर में पेशाब चटवाने का अमानवीय कृत्य हो या रायबरेली में दलित युवक की पिटाई से हुई मौत का मामला हो, असपा ने दोनों ही मुद्दों पर आंदोलन चलाया और दोषियों पर कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहा। हालांकि असपा प्रमुख कहीं भी किसी भी प्रकार के दलित, पिछड़ा समाज और अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ होने वाले उत्पीडऩ के खिलाफ मौके पर पहुंचकर सिर्फ अपना प्रतिरोध ही नहीं दर्ज कराते हैं बल्कि पीडि़त पक्ष को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन भी चलाते हैं।
सवाल- बहुजन समाज के लोगों पर जिस तरह से इस सरकार में उत्पीडऩ हो रहा है, उसे आपकी पार्टी कैसे रोक पाएगी।
जवाब- बहुजनों को न्याय तभी मिल सकता है जब हमारी सरकार हो या सरकार में मजबूत भागीदारी हो। अन्याय और अत्याचार से बचने के लिए बहुजनों को शासक बनना होगा और शासक बनने का रास्ता बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर हमें बता गये हैं। भारतीय संविधान में उन्होंने हरेक को एक वोट देने का संवैधानिक अधिकार दिया है। बहुजन समाज के लोग अपने वोट के जरिए अपनी सरकार बना सकते हैं। क्योंकि देश में हमारा वोट सबसे ज्यादा है और इसी वोट की ताकत से बहुजनों की यूपी में कई बार सरकार बनी है। कांशीराम जी कहते थे शासक वर्ग की बहन-बेटियों के खिलाफ कोई भी किसी भी तरह का उत्पीडऩ करने की हिमाकत नहीं कर सकता। इसलिए सत्ता हासिल करना या सत्ता में भागीदारी हासिल करना जरूरी है।