उजड़े हुए चमन में हरियाली जो आई है

डॉ. यदुनाथ सुमन
उजड़े हुए चमन में हरियाली जो आई है।
ये बाबा साहब के संघर्षों की कमाई है।
जिन विरोधी तत्वों को बाबा ने हराया था,
वही तत्व चमन में आग फिर लगाई है।।
भीम के सिपाही लड़ रहे हैं दुश्मनों से।
कुछ हैं विभीषण जो लड़ रहे अपनों से।
दिल- दिमाग से गुलामी निकाल दो,
साथ चलो प्रगति करो बाबा के कथनों से।।
मानवता के दुश्मन मानवता कुचल रहे।
समाज को जलाने की आग नित उगल रहे।
मेरे प्यारे भाइयों मिलके घर बचाना है,
हमें कुचलने की साजिशें वो हरदम चल रहे।।
उठो मेरे भारत के सच्चे सपूतों,
गरिमा बाबा की कम होने न देंगे।
चोरों डकैतों अत्याचारियों का,
वर्चस्व भारत में होने न देंगे।।
हर शोषण को खत्म करेंगे,
संविधान के उदगारों से।
एक लड़ाई और लड़ेंगे,
भारत के गद्दारों से।
मुक्त कराएंगे सोने की,
चिड़िया वतन लुटेरों से।
देश का जन जन पोषित होगा
अपने हक अधिकारों से।।
जय भीम नमोबुद्धाय जय संविधान जय भारत।