भाजपा और संघ से जुड़े सवर्ण कर रहे यूजीसी का विरोध
लखनऊ। दलित, ओबीसी, माइनारिटीज, आदिवासी परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. उदितराज ने कहा कि यूजीसी के नए नियम के पीछे कुछ बड़ी राजनीतिक साजिश लगती है। जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स और सवर्ण जाति के लोगों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है और ये अधिकतर बीजेपी और आरएसएस के समर्थक हैं। विरोध के बावजूद ये वोट बीजेपी को ही देंगे। दूसरे तर$फ दलित, ओबीसी और आदिवासी बीजेपी से खुश हो जाएंगे । मतलब है ‘चित भी इनका पट भी इनका।

वाराणसी में कितने मंदिर तोड़ें गये, क्या उसका बड़े पैमाने पर विरोध हुआ, हमें इसके पीछे की साजिश को समझना होगा
लगता है बीजेपी ही अंदर से विरोध करा रही वर्ना वाराणसी में कितने मंदिर तोड़ें, क्या उसका बड़े पैमाने पर विरोध किया! $गैर बीजेपी सरकार होती तो शायद ऐसा विरोध होता। क्या अब दलित, ओबीसी और आदिवासी हिंदू नहीं रहे। उनका कहना है कि उच्च शिक्षा में समानता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लागू किए गए नए इक्विटी नियम 15 जनवरी 26 से लागू हो गया है। इस नियम का मकसद उच्च शिक्षा में अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति व पिछड़ा वर्ग के साथ जातिगत भेदभाव को रोकना और सभी छात्रों को बराबरी के अवसर देना है। खास बात यह है कि अब ओबीसी भी इस परिभाषा में शामिल हो गया है।