पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को अधिक रहती रीढ़ और पीठ में दर्द की समस्या
कमल जयंत
पीठ दर्द और रीढ़ में परेशानी इन दिनों सामान्य बात होती जा रही है। प्रदेश श राजधानी लखनऊ हो यूपी का कोई भी जिला इस परेशानी से अधिकतर लोग जूझ रहे हैं। खासतौर पर महिलाओं को इन परेशानियों से ज्यादा रुबरू होना पड़ता है, इसकी मुख्य वजह उनकी दिनचर्या है। सुबह से लेकर शाम तक महिलाओं का ज्यादा समय किचन में ही वह भी खड़े रहकर ही बीतता है, जिसकी वजह से पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को रीढ़ और पीठ में दर्द की समस्या अधिक रहती है। रीढ़ में परेशानी का छुटकारा क्या सिर्फ आपरेशन से ही संभव है या इसके निदान के कुछ और भी तरीके हैं। इन्हीं तमाम मुद्दों पर लखनऊ के हेल्थ सिटी अस्पताल में चीफ न्यूरो सर्जन डॉ. हिमांशु कृष्ण से बात हुई। उन्होंने न्यूरो यानि नसों से जुडी समस्या पर विस्तार से जानकारी दी। डॉ. हिमांशु का कहना है कि अब नसों की समस्या को लेकर अगर आपरेशन की सलाह दी जाती है तो इसमें घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अब स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में तमाम अमूल-चूल बदलाव हुए हैं और अब आपरेशन का मतलब ठीक होने की गारंटी भी माना जाता है। डॉ. हिमांशु ने गर्दन में दर्द के कारण और उसके सरल उपचार के बारे में भी विस्तृत चर्चा की।

डॉ. हिमांशु कृष्ण, चीफ न्यूरो सर्जन (मो. 9450000041)
हेल्थ सिटी अस्पताल, गोमती नगर विस्तार लखनऊ
सवाल- रीढ़ की हड्डी की सर्जरी के बाद क्या ये समस्या दोबारा हो सकती है।
जवाब- रीढ़ की हड्डी हमारे शरीर की मुख्य संरचना है, जो हमें खड़ा रहने, झुकने और चलने में सहायता करती है। जब रीढ़ की हड्डी में गंभीर समस्याएं जैसे स्लिप डिस्क, स्पाइनल स्टेनोसिस, डिस्क डीजेनेरेशन, या नसों पर दबाव आदि होते हैं, तब दवाओं या फिजियोथेरेपी से राहत नहीं मिलने पर डॉक्टर स्पाइन सर्जरी की सलाह दे सकते हैं।
सवाल- स्पाइन सर्जरी कब जरूरी हो जाती है।
जवाब– लगातार और तीव्र पीठ या गर्दन में दर्द होने, नसों में दबाव के कारण हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नपन आने, स्लिप डिस्क या हर्निएटेड डिस्क में दिक्कत आने, रीढ़ की हड्डी में चोट लगने या फ्रैक्चर होने, चलने-फिरने में कठिनाई होने पर सर्जरी कराना अनिवार्य हो जाता है। वैसे स्पाइन सर्जरी के चार प्रकार होते हैं, इनमें माइक्रोडिस्केक्टॉमी – स्लिप डिस्क के इलाज के लिए, लैमिनेक्टॉमी – नसों पर से दबाव हटाने के लिए, . स्पाइनल फ्यूजन – दो या अधिक कशेरुकाओं को स्थिर करने के लिए और मिनिमली इनवेसिव सर्जरी – कम चीरा और कम रिकवरी टाइम वाली आधुनिक तकनीक से सर्जरी की जाती है।
सवाल– आपके हिसाब से स्पाइन सर्जरी कराने से शरीर को किसी भी तरह का कोई नुकसान तो नहीं होता है।
जवाब– नहीं कोई नुकसान नहीं होता है शरीर को, सर्जरी के बाद दर्द में राहत के साथ लंबे समय से चले आ रहे पीठ या गर्दन के दर्द से मुक्ति मिलती है। इसके बाद बेहतर मूवमेंट हो जाता है और चलने-फिरने, झुकने और काम करने में आसानी होती है। न्यूरोलॉजिकल सुधार की वजह से नसों के दबाव से जो कमजोरी या सुन्नपन होता है, उसमें सुधार आता है। जीवन की गुणवत्ता में सुधार होने से मरीज पहले की तरह सामान्य जीवन जी सकता है। कम रिकवरी टाइम होता है, नए जमाने की तकनीकों से मरीज जल्दी ठीक होता है और अस्पताल में कम समय बिताना पड़ता है। हालांकि, किसी भी सर्जरी की तरह स्पाइन सर्जरी के भी कुछ जोखिम हो सकते हैं, इसलिए यह जरूरी है कि सर्जरी से पहले विशेषज्ञ डॉक्टर से पूरी सलाह ली जाए और सभी विकल्पों को समझा जाए।

सवाल-रीढ़ की हड्डियों में परेशानी किन कारणों से होती है।
जवाब–रीढ़ की हड्डी के संतुलन को प्रभावित करने वाली बीमारियाँ: खराब मुद्रा जैसे खराब गुणवत्ता वाली कुर्सी, कंप्यूटर या कीबोर्ड की स्थिति, लंबे समय तक बैठे रहना, अधिक वजन और पेट की कमजोर मांसपेशियां आपकी रीढ़ की मुद्रा को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे आपको गर्दन में दर्द हो सकता है। असामान्य वृद्धि: सिस्ट, बोन स्पर्स, और ट्यूमर गर्दन के दर्द का कारण बन सकते हैं।
सवाल-पीठ दर्द के मुख्य कारण क्या हैं ।
जवाब– पीठ दर्द आजकल एक आम समस्या बन चुकी है, जो हर उम्र के लोगों को प्रभावित करती है। यह दर्द हल्का, तेज़ या फिर लगातार बना रह सकता है। पीठ दर्द के कई कारण हो सकते हैं जैसे गलत मुद्रा (पोश्चर), भारी सामान उठाना, लंबे समय तक बैठना, कमज़ोर मांसपेशियाँ, तनाव या फिर रीढ़ की हड्डी से संबंधित कोई समस्या का होना मुख्य कारण है। इसकी कुछ अन्य प्रमुख वजह भी हैं जिनमें गलत तरीके से बैठने या खड़े रहने, भारी वजन उठाने, अत्यधिक मोबाइल या कंप्यूटर का उपयोग करने, मांसपेशियों में खिंचाव आने और गठिया, स्लिप डिस्क जैसी चिकित्सीय स्थितियाँ होने की वजह मुख्य कारण हैं ।
सवाल- पीठ दर्द से राहत पाने के उपाय क्या हैं
जवाब– गर्म या ठंडी सिंकाई: बर्फ या गर्म पानी की बोतल से सेक करने पर सूजन और दर्द में राहत मिलती है। हल्की स्ट्रेचिंग और योग: भुजंगासन, मार्जरी आसन और बालासन जैसे योगासन पीठ दर्द में लाभदायक होते हैं। सही मुद्रा अपनाएं: बैठते समय पीठ को सीधा रखें और कुर्सी पर कमर को सहारा दें। आराम और नींद: शरीर को पूरा आराम देना ज़रूरी है, ताकि मांसपेशियाँ ठीक हो सकें। मालिश (तेल से): आयुर्वेदिक तेलों से मालिश करने से मांसपेशियों को आराम मिलता है। दवाइयाँ और फिजियोथेरेपी: डॉक्टर की सलाह से पेन किलर्स, मांसपेशियों को ढीला करने वाली दवाएं और फिजियोथेरेपी ली जा सकती है। यदि पीठ दर्द लम्बे समय तक बना रहे या बहुत ज़्यादा तेज हो, तो डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।
सवाल-गर्दन में दर्द का कारण, इसके लक्षण क्या हैं और इसका इलाज क्या है।
जवाब- गर्दन या सर्वाइकल स्पाइन जोड़ों, हड्डियों, मांसपेशियों और तंत्रिकाओं का एक जटिल नेटवर्क है। आपकी गर्दन में, सर्वाइकल डिस्क ग्रीवा हड्डियों या कशेरुकाओं को क्षति पहुँचाने वाली ताकत की तीव्रता को कम करती है। चूँकि गर्दन सिर को सहारा देती है और अन्य कार्य करने में मदद करती है, इसीलिए गर्दन का दर्द परेशानी का कारण बन सकता है। इसका इलाज और समाधान दोनों ही सावधानी है। लापरवाही के कारण कई बार तनाव की वजह से भी मांसपेशियों पर असर होता है जिससे गर्दन के ऑपरेशन की भी नौबत आ सकती है।
सवाल– क्या गर्दन में तनाव बढ़ने से ऑपरेशन की भी नौबत या सकती है।
जवाब– नसों में दवाब आने से गर्दन में हर्नियेटेड डिस्क या बोन स्पर्स रीढ़ की हड्डी से आने वाली नसों पर दबाव डाल सकते हैं। जिसके कारण ऑपरेशन की भी नौबत आ सकती है। कई बार मैनिंजाइटिस, कैंसर, और गठिया जैसी कई बीमारियाँ भी गर्दन के दर्द के कारणों में से एक हो सकती हैं। इसके अलावा चोट: व्हिपलैश चोट सिर को पीछे और आगे की ओर झटका दे सकती हैं, जिससे गर्दन के मांसपेशियों पर दबाव डालता है। तनाव की वजह से भी मांसपेशियों पर असर होता है जिससे गर्दन के ऑपरेशन की भी नौबत आ सकती है।
सवाल- गर्दन में दर्द का उपचार क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है ।
जवाब- दर्द के कारण के आधार पर गर्दन के दर्द का इलाज अलग-अलग प्रकार का हो सकता है। हालाँकि, दर्द के उपचार का मुख्य उद्देश्य दर्द से आराम और गर्दन के कार्य करने की क्षमता में सुधार करना होता है। गर्दन के दर्द के लिए उपचार के कई विकल्प उपलब्ध हैं, इनमें डॉक्टर गर्दन में सूजन और दर्द को कम करने के लिए दवाइयाँ आपको लिख सकते हैं। मांसपेशियों को आराम देने के लिए मसल रिलक्सेंट भी कारगर होती हैं। ट्रांसक्यूटेनियस इलेक्ट्रिकल नर्व स्टिमुलेशन इसमें दर्द पैदा करने वाली नसों के करीब की त्वचा पर निम्न स्तर के विद्युत प्रवाह लगाया जाता है जिससे दर्द के संकेतों को रोक कर गर्दन के दर्द को कम किया जाता है। फिजियोथेरेपी, जैसे सर्वाइकल आइसोमेट्रिक व्यायाम गर्दन में टेंडन और मांसपेशियों को मजबूत करती हैं जिससे गर्दन के दर्द से भी राहत मिलती है।ट्रैक्शन का उपयोग करके गर्दन के दर्द में भी राहत मिलती है। सर्जरी: क्षतिग्रस्त या संकुचित रीढ़ की हड्डी की डिस्क या आपस में जुड़ी हुई रीढ़ की हड्डीयों को सर्जरी से ठीक किया जा सकता हैं, खासकर जब बाहों या उंगलियों में दर्द फैल रहा हो। नसों की जड़ों के करीब दिए जाने पर स्टेरॉयड इंजेक्शन से गर्दन की सूजन और दर्द में काफ़ी राहत मिलती है।